Romantic love poem 
सिर्फ़ उस के होठ कागज़ पर बना देता हूँ मैं 
ख़ुद बना लेती है होठों पर हँसी अपनी जग़ह 
अनवर शऊर

आँखों में तैरती है तस्वीरें 
तेरा चेहरा तेरा खयाल लिये 
आईना देखता है जब मुझको 
एक मासूम सा सवाल लिये 
गुलज़ार

हम आज अपना मुक़द्दर बदल के देखते हैं.. तुम्हारे साथ भी कुछ दूर चल के देखते हैं..!! नफ़स अम्बालवी

नक़्शा है उन की चश्म में लैला की चश्म का
मजनूँ हो शाद क्यूँ न ग़ज़ालों को देख कर
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
【चश्म=आंखे,शाद=ख़ुश,ग़ज़ालों=हिरन,
चिंकारा】

काबिल-ए-दाद यह आखें की इन आँखों से खुद ही पामाल हुए खुद ही तमाशा देखा 
【पामाल=पैरों से कुचला जाना】
अज्ञात
Romantic shayari


मुहब्बत करो तो आदाबे मुहब्बत भी सीखो फा़रिग वक़्त की बेक़रारी मुहब्बत नहीं होती
अज्ञात
फा़रिग=निश्चिंत,मुक्त,आज़ाद】

मोहब्बत,मालिकाना हक़ नहीं है, 
दिलों की,एक हसीं फ़रियाद है ये 
अज्ञात
Love | ishq | pyaar 
किस नाज़ किस अंदाज़ से तुम हाए चले हो रोज़ एक ग़ज़ल हम से कहलवाए चले हो रखना है कहीं पाँव तो रक्खो हो कहीं पाँव चलना ज़रा आया है तो इतराए चले हो 
मय में कोई ख़ामी है न साग़र में कोई खोट पीना नहीं आए है तो छलकाए चले हो कलीम आजिज़

दिन बैठ के बस सोचते रहते हैं तुझे एक यही काम तो फुर्सत से किया जाता है
मेराज नक़वी

जिस तरफ़ तू ने किया एक इशारा न जिया
न जिया आह तिरी चश्म का मारा न जिया
अज्ञात

हुस्न का हर ख़याल रौशन है
इश्क़ का मुद्दआ किसे मालूम
सेहर इश्क़ाबादी

हाथ रख रख के वो सीने पे किसी का कहना
दिल से दर्द उठता है पहले कि जिगर से पहले
हफ़ीज़ जालंधरी

एक हम हैं रात भर करवट बदलते ही कटी
एक वो हैं दिन चढ़े तक जिन का दर खुलता नहीं
सेहर इश्क़ाबादी

उठते देखा जो तुम को पहलू से
दर्द भी उठ खड़ा हुआ दिल का
जलील मानिकपूरी

मरता है जो महबूब की ठोकर पे 'नज़ीर' आह
फिर उस को कभी और कोई लत नहीं लगती
नज़ीर अकबराबादी

आह करता हूँ तो आती है पलट कर ये सदा
आशिक़ों के वास्ते बाब-ए-असर खुलता नहीं
सेहर इश्क़ाबादी
बाब-ए-असर=प्रभाव का द्वार,जहां से प्रभाव प्रवेश करता है】

अदब लाख था फिर भी उन की तरफ़
नज़र मेरी अक्सर रही देखती
अज्ञात

अब आप कोई काम सिखा दीजिए हम को
मालूम हुआ इश्क़ के क़ाबिल तो नहीं हम
बेख़ुद देहलवी

लिया है दिल ही फ़क़त और जान बाक़ी है
अभी तो काम तुम्हें मेहरबान बाक़ी है
मीर असर

दिल ले के मुफ़्त कहते हैं कुछ काम का नहीं
उल्टी शिकायतें हुईं एहसान तो गया
दाग़ देहलवी

ये मोहब्बत भी एक नेकी है
इस को दरिया में डाल आते हैं
इनाम नदीम

बात जो दिल में धड़कती है मोहब्बत की तरह
उस से कहनी भी नहीं उस से छुपानी भी नहीं
अय्यूब ख़ावर

मोहब्बत और मजनूँ हम तो सौदा इस को कहते हैं
फ़िदा लैला पे था आँखों का अंधा इस को कहते हैं
बेख़ुद देहलवी

दिलों का ज़िक्र ही क्या है मिलें मिलें न मिलें
नज़र मिलाओ नज़र से नज़र की बात करो
सूफ़ी तबस्सुम

ईलाही क्या क्यामत है, कि जब वो लेते हैं , अंगड़ाई
कि टाँके मेरे जख्मों के, वो सारे टूट जाते हैं
कैलाश एन शर्मा

दिल को दीवाना तबीअ'त को मुसीबत न बना
तुझ से याराना है याराना.......मोहब्बत न बना
यूनुस तहसीन

होश-मंदी से जहाँ बात न बनती हो 'सहर' 
काम ऐसे में बहुत बे-ख़बरी आती है 
अबु मोहम्मद सहर

ज़िद उसकी थी चाँद देखने की ,
सामने आईना रख दिया मैंने।
अज्ञात

मुद्दत से ख़्वाब में भी नहीं नींद का ख़याल 
हैरत में हूँ ये किस का मुझे इंतिज़ार है 
शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

'बेख़ुद' तो मर मिटे जो कहा उस ने नाज़ से
इक शेर आ गया है हमें आप का पसंद
बेख़ुद देहलवी




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