Unique Love shayari 

Best love shayari for all

Best urdu love shayari in hindi 

बात जो दिल में धड़कती है मोहब्बत की तरह
उस से कहनी भी नहीं उस से छुपानी भी नहीं
अय्यूब ख़ावर

तुम सुनो या न सुनो हाथ बढ़ाओ न बढ़ाओ
डूबते  डूबते इक  बार पुकारेंगे .........तुम्हें 
इरफ़ान सिद्दीक़ी

शब की आग़ोश में महताब उतारा उस ने
मेरी आँखों में कोई ख़्वाब उतारा उस ने
अज़्म शाकरी
【शब=रात,महताब=चांद】

दिल नज़्र करो ज़ुल्म सहो नाज़ उठाओ
ऐ अहल-ए-तमन्ना ये हैं अरकान-ए-तमन्ना
नूह नारवी
【नज़्र=अर्पित करना,नाज़=नखरे,अहल-ए-तमन्ना=लोगों की ख्वाहिशें,अरकान-ए-तमन्ना=ख्वाहिशों की बुनियाद】

तुम बनाओ किसी तस्वीर में कोई रस्ता
मैं बनाता हूं कहीं दूर से... आता हुआ मैं
अली ज़रयूं

उसकी बे-लफ्ज गूफ्तगु के लिये,
आंख को कान करना पडता है।।
अज्ञात

नींद बेदर्द थी शब भर नहीं आई फिर भी
मैंने आँखों को तेरे ख़्वाबों का लालच भी दिया
मेराज नक़वी

अब मैं और क्या क्या हूँ ..जानने के लिए..
ओ यारा..तेरा मिलना बहोत ज़रूरी है
अज्ञात

हर एक रात को महताब देखने के लिए
मैं जागता हूँ तिरा ख़्वाब देखने के लिए
अज़हर इनायती

इश्क़ कर, दिल लगा और क्या,
देख ले, हार जा और क्या!
मोहम्मद उमर सिद्दीकी

ज़रा रूठ जाने पे इतनी ख़ुशामद,
'क़मर' तुम बिगाड़ोगे आदत किसी की
क़मर जलालवी
【ख़ुशामद=चापलूसी】

इतना ऐहतराम है दिल में उस पर्दा नशीं का 
बे पर्दा सामने आ जाए तो नज़र झुक जाती है
फ़िज़ा
【ऐहतराम=सम्मान,पर्दा नशीं=जो घूंघट या नकाब से अपना चेहरा छुपाये हुए है】

मोहब्बत बाँटना सीखो मोहब्बत है अता रब की
मोहब्बत बाँटने वाले तवील-उल-उम्र होते हैं
बशीर महताब
【तवील-उल-उम्र=लम्बी आयु】

उम्र लुटाई जा सकती है इक लम्हे पर 
इक लम्हा ताउम्र चलाया जा सकता है !
अज्ञात

तुमसे मिल कर इतनी तो उम्मीद हुई है ....
इस दुनिया में वक़्त बिताया जा सकता है !!
मनोज अज़हर

ये नाराजगी फ़ोन तक ही रहने देना तुम..
कभी अचानक मिल जाऊँ तो मुस्कुरा देना..
अज्ञात


आशिक़ी में 'मीर' जैसे ख़्वाब मत देखा करो
बावले हो जाओगे महताब मत देखा करो
अहमद फ़राज़

ना उम्मीदी मोत से कहती है अपना काम कर 
आस कहती है ठहर ख़त का जवाब आने को है
फ़ानी बदायूनी

कौन देता है मोहब्बत को परस्तिश का मक़ाम
तुम ये इंसाफ़ से सोचो दो दुआ दो हमको
एहसान दानिश
【परस्तिश=पूजा,बेहद चाहना】

वो मेरे लम्स से महताब बन चुका होता
मगर मिला भी तो जुगनू पकड़ने वालों को
नोमान शौक़
【लम्स=स्पर्श,छुअन】

कभी कभार उसे देख लें कहीं मिल लें
ये कब कहा था कि वो ख़ुश-बदन हमारा हो 
परवीन शाकिर

अब तो इक बार को बनता है पलटना तेरा
अब तो आई है उस इनकार की रौनक़ हम पर
रेनू नय्यर

आप की नाज़ुक कमर पर बोझ पड़ता है बहुत 
बढ़ चले हैं हद से गेसू कुछ इन्हें कम कीजिए 
हैदर अली आतिश

आप पहलू में जो बैठें तो सँभल कर बैठें
दिल-ए-बेताब को आदत है मचल जाने की
जलील मानिकपूरी

उस को आवाज़ दो मोहब्बत से
उस के सब नाम प्यारे प्यारे हैं
महताब अालम

क़र्ज़दार रहेंगे हम उस हक़ीम के,
जिसने दवा में आप का दीदार लिख दिया
अज्ञात

पाँव साकित हो गए 'सरवत' किसी को देख कर
इक कशिश महताब जैसी चेहरा-ए-दिलबर में थी
सरवत हुसैन
【साकित=गतिहीन, बे-हरकत】

मेरी नज़र से न हो दूर इक पल के लिए
तेरा वजूद है लाज़िम मेरी ग़ज़ल के लिए
क़तील शिफ़ाई

इश्क़ और इश्क़ के आदाब का क्या करना है
तू नहीं है तो..किसी ख़्वाब का क्या करना है
क़य्यूम ताहिर

“तेरे सिवा भी कई रंग खुश नज़र थे मगर...
 जो तुझको देख चुका हो वो और क्या देखे”
परवीन शाकिर

तिरी आरज़ू तिरी जुस्तजू में भटक रहा था गली गली
मिरी दास्ताँ तिरी ज़ुल्फ़ है जो बिखर बिखर के सँवर गई
बशीर बद्र

बटन  बस शर्ट में इक टांक देते
तो सब ग़ुस्सा उतर जाता हमारा
फहमी बदायुनी

तू हक़ीक़त भी है दिलचस्प कहानी ही नहीं
तिरी हस्ती भी है एक चीज़ जवानी ही नहीं
अपनी तारीक़ का उन्वान बदलना है तुझे
उठ मिरी जान मिरे साथ ही चलना है मुझे
कैफ़ी आज़मी
【तारीक़=त्यागी,उन्वान=शीर्षक】



2 Comments

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  1. तुझे पाने की कोशिश में कुछ इतना खो चुका हूं मैं
    कि तू मिल भी अगर जाए तो अब मिलने का ग़म होगा
    -वसीम बरेलवी

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