Unique zindagi shayari
ज़िंदगी से जुड़ीं बेहद दिलकश शायरी 

मैं शीशा क्यूँ न बना आदमी हुआ क्यूँकर
मुझे तो उम्र लगी टूट फूट जाने तक
इफ़्तिख़ार नसीम
Unique zindagi shayari


मैं बताऊँ फ़र्क़ नासेह जो है मुझ में और तुझ में
मिरी ज़िंदगी तलातुम तिरी ज़िंदगी किनारा
शकील बदायुनी
【नासेह=सलाह देने वाला,तलातुम=लहरों में होने वाली तीव्र उथलपुथल 】


रोज़ खाली हाथ जब घर लौटकर जाता हूं मैं
मुस्करा देते हैं बच्चे और मर जाता हूं मैं 
राजेश रेड्डी 

हमारी ज़िंदगी कहने की हद तक ज़िंदगी है बस
ये शीराज़ा भी देखा जाए तो बरहम है बरसों से
वक़ार मानवी
【शीराज़ा=ज़िल्द चढ़ी हुई किताब,.एक क्रम में किसी वस्तु को एकत्र करने का ढंग ,बरहम=छिन्न भिन्न】

मैं उम्र को तो मुझे उम्र खींचती है उलट
तज़ाद सम्त का है अस्प और सवार के बीच
एजाज़ गुल
【तज़ाद=विरोधी भाव,सम्त=दिशाओं,अस्प=घोड़ा】

सिर्फ़ सांसों का ख़ज़ाना है ख़ज़ाना ऐसा 
ख़त्म करके ही मरा करता है जीने वाला 
मुनव्वर अली 'ताज'

हर नफ़स मिन्नत-कश-ए-आलाम है
ज़िंदगी शायद इसी का नाम है
अकबर हैदरी
【नफ़स=सांस,मिन्नत-कश-ए-आलाम=दुःख मांगने वाला】

है यूँ भी ज़ियाँ और यूँ भी ज़ियाँ 
जी जाओ तो क्या मर जाओ तो क्या 
उबैदुल्लाहअलीम
【ज़ियाँ=घाटा】

Life shayari
यही ज़िंदगी मुसीबत यही ज़िंदगी मसर्रत
यही ज़िंदगी हक़ीक़त यही ज़िंदगी फ़साना
मुईन अहसन जज़्बी
【मसर्रत=खुशी】

वही है ज़िंदगी लेकिन 'जिगर' ये हाल है अपना
कि जैसे ज़िंदगी से ज़िंदगी कम होती जाती है
जिगर मुरादाबादी

जो खो जाता है मिलकर ज़िन्दगी में
 ग़ज़ल है नाम उसका शायरी में 
निदा फ़ाज़ली

मिरा वजूद जो पत्थर दिखाई देता है
तमाम उम्र की शीशागरी का हासिल है
ऐन इरफ़ान
【शीशागरी=कांच बनाने का हुनर】

Shayari on zindagi | jeevan 
मुसीबत और लम्बी ज़िंदगानी
बुज़ुर्गों की दुआ ने मार डाला
मुज़्तर ख़ैराबादी

जीत ले जाए कोई मुझ को नसीबों वाला
ज़िंदगी ने मुझे दाँव पे .लगा रक्खा है 
क़तील शिफ़ाई

ज़ुल्मतों में रौशनी की जुस्तुजू करते रहो
ज़िंदगी भर ज़िंदगी की जुस्तुजू करते रहो
अनवर साबरी

बहुत छोटा सफ़र था ज़िंदगी का
मैं अपने घर के अंदर तक न पहुँचा
अहमद शनास

सब से पहले दिल के ख़ाली-पन को भरना
पैसा सारी उम्र कमाया जा सकता है

ग़म-ए-हयात की कीलें थीं दस्त-ओ-पा में जड़ीं
तमाम उम्र रहे हम सलीब पर लटके
वहीद अर्शी
【ग़म-ए-हयात=ज़िन्दगी के दुःख,दस्त-ओ-पा=हाथ और पाँव】

मसर्रत ज़िंदगी का दूसरा नाम
मसर्रत की तमन्ना मुस्तक़िल ग़म
जिगर मुरादाबादी
【मुस्तक़िल=चिरस्थायी】

तज़्किरा हो तिरा ज़माने में
ऐसा पहलू कोई बयान में रख
उमैर मंज़र
【तज़्किरा=किसी विषय पे संवाद होना】

हमेशा मैं ने गरेबाँ को चाक चाक किया
तमाम उम्र रफ़ूगर रहे रफ़ू करते
हैदर अली आतिश
【गरेबाँ=कॉलर,चाक=टुकड़े】

कम ज़रा न होने दी एक लफ़्ज़ की हुरमत
एक अहद की सारी उम्र पासदारी की
इकराम मुजीब
【हुरमत=इज़्ज़त,अहद=काल समय,पासदारी=निगरानी】

तमाम उम्र सितारे तलाश करता फिरा
पलट के देखा तो महताब मेरे सामने था
सलीम कौसर
【महताब=चाँद】

अजब सी कशमकश तमाम उम्र साथ साथ थी
रखा जो रूह का भरम तो जिस्म मेरा मर गया
अलीना इतरत



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