Shayari On Shikwa Shikayat
शिकवा-शिकायत लफ्ज़ पर बेहतरीन शायरों की कलम से कुछ चुनिंदा शायरी 
Best shayari on shikayat lafz


◆बात अब आई समझ में...कि हक़ीक़त क्या थी एक जज़्बात की शिद्दत थी...मोहब्बत क्या थी अब ये जाना कि वो दिन-रात के शिकवे क्या थे अब ये मालूम हुआ वज्ह-ए-शिकायत क्या थी ~एहसास दरबांगवी


◆कहने देती नहीं कुछ मुँह से मुहब्बत मेरी लब पे रह जाती है आ आ के शिकायत मेरी 
~दाग देहलवी

◆कोई शिकवा नहीं है,उनसे हमें,
  उन्हें हमसे ,बस यही शिकवा है !
Shayari On Shikwa Shikayat

हम से 'आबिद' अपने रहबर को शिकायत ये रही
आँख मूँदे उन के पीछे चलने वाले हम नहीं
~आबिद अदीब

◆मुसलसल हादसों से बस मुझे इतनी शिकायत है
कि ये आँसू बहाने की भी तो मोहलत नहीं देते
~वसीम बरेलवी
[मुसलसल-निरन्तर]

◆नहीं है......बेवफ़ाई की शिकायत 
  तुम्हारी कम-निगाही का गिला है 
~बशीर फ़ारूक़
[कम-निगाही-नज़र-अंदाज़]

◆चुप रहो तो पूछता है ख़ैर है
 लो ख़मोशी भी शिकायत हो गई
  ~अख़्तर अंसारी अकबराबादी
Shayari On Shikwa Shikayat

◆मुझे तुझ से शिकायत भी है लेकिन ये भी सच है
  तुझे ऐ ज़िंदगी मैं वालिहाना चाहता हूँ
     ~ख़ुशबीर सिंह शाद
[वालिहाना-बेहद प्यार से]

 ◆नज़रों के सिलसिले थे रिश्ता कोई न था
   किस से करें शिकायत अपना कोई न था
      ~एहसास मगहरी

◆शिकायतें भी बहुत हैं हिकायतें भी बहुत
  मज़ा तो जब है कि यारों के रू-ब-रू कहिए
     ~अली सरदार जाफ़री
[हिकायतें-किस्से-कहनियां जिनमे उलाहना व्यक्त हो]

◆मोहब्बत ही में मिलते हैं शिकायत के मज़े पैहम
मोहब्बत जितनी बढ़ती है शिकायत होती जाती है
~शकील बदायुनी
[पैहम-लगातार]
Shayari On Shikwa Shikayat

◆बख़्त से कोई शिकायत है न अफ़्लाक से है
 यही क्या कम है कि निस्बत मुझे इस ख़ाक से है
  ~परवीन शाकिर
[बख़्त-नसीब,अफ़्लाक-ऊपरवाले से,निस्बत-जुड़ाव,लगाव]

◆दिल ले के मुफ़्त कहते हैं कुछ काम का नहीं
  उल्टी शिकायतें हुईं एहसान तो गया
     ~दाग़ देहलवी

◆रात से शिकायत क्या बस तुम्हीं से कहना है
तुम ज़रा ठहर जाओ रात कब ठहरती है
~नज़ीर सिद्दीक़ी

◆दे मुझ को शिकायत की इजाज़त कि सितमगर
कुछ तुझ को मज़ा भी मिरे आज़ार में आवे
~मिर्ज़ा ग़ालिब
[आज़ार-पीड़ा,दुख]
Shayari On Shikwa Shikayat


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