One of the best 21 mirza ghalib urdu shayari That will touch your heart

मिर्ज़ा ग़ालिब की बेहतरीन शायरी  




Mirza ghalib best shayari

◆कहाँ मय-ख़ाने का दरवाज़ा 'ग़ालिब' और कहाँ वाइज़ 

पर इतना जानते हैं कल वो जाता था कि हम निकले 

~मिर्ज़ा ग़ालिब

(वाइज़=धर्मोपदेशक,समझदार व्यक्ति)


 ◆क़र्ज़ की पीते थे मय लेकिन समझते थे कि हाँ 

रंग लावेगी हमारी फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन 

~मिर्ज़ा ग़ालिब
(फ़ाक़ा-मस्ती=गरीबी के दिनों में उठाया गया लुत्फ़)


 ◆बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे 
    होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मिरे आगे
     ~मिर्ज़ा ग़ालिब
      (बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल=बच्चों के खेलने का मैदान,शब=रात्रि)

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मिर्ज़ा ग़ालिब की बेहतरीन शायरी  

◆ रंज से ख़ूगर हुआ इंसाँ तो मिट जाता है रंज 

मुश्किलें मुझ पर पड़ीं इतनी कि आसाँ हो गईं

~मिर्ज़ा ग़ालिब

(रंज=दुश्मनी,ख़ूगर=खून से लथपथ)


◆बस-कि दुश्वार है हर काम का आसाँ होना 

आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसाँ होना 

~मिर्ज़ा ग़ालिब

(दुश्वार=मुश्किल,मयस्सर=नसीब)


◆हैरां हूँ तुझे मस्जिद में देख के गालिब ऐसा भी क्या हुआ जो खुदा याद आ गया

~ मिर्जा गालिब


◆'ग़ालिब' बुरा न मान जो वाइज़ बुरा कहे ऐसा भी कोई है कि सब अच्छा कहें जिसे 

~मिर्ज़ा ग़ालिब


◆रहिए अब ऐसी जगह चल कर जहाँ कोई न हो हम-सुख़न कोई न हो और हम-जबाँ कोई न हो 

~ मिर्ज़ा ग़ालिब

(हम-सुख़न =कहा हुआ न समझने वाला,हम-जबाँ=बात कहने सुनने वाला)

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◆हम ने माना कि तग़ाफ़ुल न करोगे लेकिन ख़ाक हो जाएँगे हम तुम को ख़बर होते तक 

~मिर्ज़ा ग़ालिब

(तग़ाफ़ुल =उपेक्षा)


◆हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले. 

~ मिर्ज़ा ग़ालिब.


◆आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक 

~मिर्ज़ा ग़ालिब


◆क्यूंकर उस बुत से रखूं जान अज़ीज़ क्या नहीं है मुझे ईमान अज़ीज़ दिल से निकला पे न निकला दिल से है तिरे तीर का पैकान अज़ीज़ ताब लाए ही बनेगी 'ग़ालिब' वाक़िआ सख़्त है और जान अज़ीज़ 

~ मिर्ज़ा ग़ालिब

(पैकान=सीना,ताब=उष्णता,गर्मी)


◆कुछ खटकता था मिरे सीने में लेकिन आख़िर/जिस को दिल कहते थे तीर का पैकाँ निकला

 ~ मिर्ज़ा ग़ालिब 

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◆बे-खुदी बे-सबब नहीं गा़लिब
 कुछ तो है जिस की पर्दा-दारी है 

~मिर्जा गालिब 


◆उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़
 वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है 

~मिर्ज़ा ग़ालिब


◆उम्र भर ग़ालिब यही भूल करता रहा 
धुल चेहरे पे थी आइना साफ़ करता रहा 

~मिर्ज़ा ग़ालिब


◆तिरे वा'दे पर जिए हम तो ये जान झूट जाना 
कि ख़ुशी से मर न जाते अगर ए'तिबार होता 

~मिर्ज़ा ग़ालिब


◆इशरत -ए-कतरा है दरिया में फना हो जाना.... 
दर्द का हद से गुजरना है दवा हो जाना 

~मिर्ज़ा ग़ालिब

(इशरत=ख़ुशी)


◆हम को मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन, 
दिल को खुश रखने को 'गालिब' ये खयाल अच्छा है 

~ मिर्जा गालिब

Shayari in hindi 


◆मुझसे कहती है तेरे साथ रहूंगी सदा 'ग़ालिब', 
बहुत प्यार करती है मुझसे उदासी मेरी.! 

~ मिर्ज़ा ग़ालिब


◆रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ाइल 
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है 

~ मिर्ज़ा ग़ालिब
(क़ाइल=सहमत,समर्थन में)

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मिर्ज़ा ग़ालिब की बेहतरीन शायरी  
















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