Huzur is qadar bhi na itra k chaliye
A beautiful romantic gazal/song by Gulzaar saheb

हुज़ूर इस कदर भी न इतरा के चलिये
खुले आम आँचल न लहरा के चलिये 
Huzur is qadar bhi na itraa ke chaliye


कोई मनचला गर पकड़ लेगा आँचल
ज़रा सोचिये आप क्या कीजियेगा
लगा दें अगर बढ़ के ज़ुल्फ़ों में कलियाँ
तो क्या अपनी ज़ुल्फ़ें झटक दीजियेगा

बहुत दिलनशीं हैं हँसी की ये लड़ियां
ये मोती मगर यूँ ना बिखराया कीजे
उड़ाकर न ले जाये झोंका हवा का
लचकता बदन यूँ ना लहराया कीजे
हुज़ूर इस ...

बहुत खूबसूरत है हर बात लेकिन
अगर दिल भी होता तो क्या बात होती
लिखी जाती फिर दास्तान-ए-मुहब्बत
एक अफ़साने जैसे मुलाक़ात होती
हुज़ूर इस …
             ~ गुलज़ार

हुज़ूर इस क़दर भी ना इतरा के चलिए 

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