A beautiful Gazal by इब्राहीम अश्क
अगर इंसान हो ख़ुद्दारियों से घर भरे रखियो



Beautiful gazal

लबों पर प्यास हो तो आस के बादल भरे रखियो 
सराबों के सफ़र में इस तरह गुलशन हरे रखियो 
【सराबों=मृगतृष्णा】

ये बाज़ार-ए-जहाँ है बे-ग़रज़ कोई नहीं मिलता 
परख कर जब तलक देखो नहीं सब को परे रखियो 

वफ़ा के बोल पर बे-मोल बिक जाती है ये दुनिया 
अगर हो बे-सर-ओ-सामाँ तो ये सिक्के खरे रखियो 
【बे-सर-ओ-सामाँ=जिसके पास कुछ न हो 】

किसी के सामने दामन पसारे से मिलेगा क्या 
अगर इंसान हो ख़ुद्दारियों से घर भरे रखियो 

शराबों से भरे प्याले मुझे तकने की आदत है 
बदन भीगा रसीले होंट नैना मद-भरे रखियो 

न जाने कब किसी के ख़्वाब से ये दिल धड़क जाए 
अगर सोने लगो तो हाथ सीने पर धरे रखियो

                                           इब्राहीम अश्क

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