Best Shayari On Life In Hindi Script |
Ik jaise hain dukh sukh sab key..


वापस पलट रहे हैं अज़ल की तलाश में 
मंसूख़ आप अपना लिखा कर रहे हैं हम 
ज़ुल्फ़िक़ार आदिल
【अज़ल=जहाँ से सृष्टि का आरम्भ हुआ था,मंसूख़=रद्द करना】
Ultimate shayari on life



इक जैसे हैं दुख सुख सब के इक जैसी उम्मीदें
एक कहानी सब की क्या उनवान किसी का रक्खें
ज़करिय़ा शाज़
【उनवान=शीर्षक】

ज़िंदगी तो कभी नहीं आई
मौत आई ज़रा-ज़रा करके
राजेश रेड्डी

जनाज़ा रहबरी करता है पीछे चलने वालो की,
उन्हें रस्ता दिखाता है जो रस्ता भूल बैठे हैं.
अज्ञात
【रहबरी=नेतृत्व】

【तौक़ीर=सम्मान, प्रतिष्ठा】

ख़्वाबों पर इख़्तियार न यादों पे ज़ोर है 
कब ज़िंदगी गुज़ारी है अपने हिसाब में 
फ़ातिमा हसन
【इख़्तियार=नियन्त्रण】

वो हादसे भी दहर में हम पर गुज़र गए
जीने की आरज़ू में कई बार मर गए
उनवान चिश्ती
【दहर=काल,समय】

ख़्वाब, उम्मीद, तमन्नाएँ, तअल्लुक़, रिश्ते 
जान ले लेते हैं आख़िर ये सहारे सारे 
इमरान-उल-हक़ चौहान


ज़िंदगी हो तो कई काम निकल आते हैं 
याद आऊँगा कभी मैं भी ज़रूरत में उसे 
फ़ाज़िल जमीली

इक मुअम्मा है समझने का न समझाने का 
ज़िंदगी काहे को है ख़्वाब है दीवाने का 
फ़ानी बदायुनी
【मुअम्मा=पहेली】

मिरी समझ में आ गया हर एक राज़-ए-ज़िंदगी
जो दिल पे चोट पड़ गई तो दूर तक नज़र गई
उनवान चिश्ती

माज़ी-ए-मरहूम की नाकामियों का ज़िक्र छोड़ 
ज़िंदगी की फ़ुर्सत-ए-बाक़ी से कोई काम ले...
सीमाब  अकबराबादी
【माज़ी-ए-मरहूम=अतीत में जो छूट गया,फ़ुर्सत-ए-बाक़ी=जो पल बच गए हैं】

ज़िंदगी ख़्वाब देखती है मगर 
ज़िंदगी ज़िंदगी है ख़्वाब नहीं 
मक़बूल नक़्श

ज़रा देखें तो दुनिया कैसे कैसे रंग भरती है
चलो हम अपने अफ़्साने का ग़म उनवान रखते हैं
राम अवतार गुप्ता मुज़्तर

यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें 
इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो 
निदा फ़ाज़ली

राख की कई परतों के नीचे तक देखा पर अफ़सोस वो गुरुर, वो रूबाब, वो पद और रुतबा कहीं नज़र नहीं आया जो सारी उम्र ओढ़े बैठे थे
अज्ञात

तौबा का तकल्लुफ़ कौन करे हालात की निय्यत ठीक नहीं
रहमत का इरादा बिगड़ा है बरसात की निय्यत ठीक नहीं
अब्दुल हमीद अदम
【तौबा=पश्चाताप】

इरादे बाँधता हूँ सोचता हूँ तोड़ देता हूँ
कहीं ऐसा न हो जाए कहीं ऐसा न हो जाए
हफ़ीज़ जालंधरी

दूर तक ये रास्ते ख़ामोश हैं
दूर तक हम ख़ुद को सुनते जाएँगे
तनवीर अंजुम

वक़्त के साथ बदलना तो बहुत आसाँ था 
मुझ से हर वक़्त मुख़ातिब रही ग़ैरत मेरी 
अमीर क़ज़लबाश
【मुख़ातिब=प्रत्यक्ष,सामने मौजूद,ग़ैरत=आत्मसम्मान】

राय उस पर मत करो क़ाएम कोई
जानते जिस को नहीं नज़दीक से
इफ़्तिख़ार राग़ि

“मुद्दतों से लापता थे हम ज़िंदगी के कारवाँ में कहीं...
आज फ़ुर्सत से बैठे तो ..ख़ुद से मुलाक़ात हुई....”
अज्ञात

किस को देती है ठहरने की इजाज़त दुनिया
मैं भी एक शाम गुजारूँगा चला जाऊँगा 
अनवर कमालब

ख़्वाहिश सुखाने रक्खी थी कोठे पे दोपहर
अब शाम हो चली मियाँ देखो किधर गई
आदिल मंसूरी

रात तो वक़्त की पाबंद है ढल जाएगी 
देखना ये है चराग़ों का सफ़र कितना है 
वसीम बरेलवी

ज़िन्दगी गुज़र जाती है ये ढूँढने में कि, ढूंढना क्या है..!! अंत में तलाश सिमट जाती है इस सुकून में कि, जो मिला..वो भी कहाँ साथ लेकर जाना है .. !!!
अज्ञात
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