Best politics shayari
Politics shayari 


तअ'ज्जुब कुछ नहीं 'दाना' जो बाज़ार-ए-सियासत में
क़लम बिक जाएँ तो सच बात लिखना छोड़ देते हैं
अब्बास दाना


काग़ज़ों पर मुफ़्लिसी के मोर्चे सर हो गए
और कहने के लिए हालात बेहतर हो गए
मनीष शुक्ला
【मुफ़्लिसी=गरीबी】

तख़्ता-ए-दार पे चाहे जिसे लटका दीजे
इतने लोगों में गुनाहगार कोई तो होगा
शहज़ाद अहमद
【तख़्ता-ए-दार=जहाँ फांसी दी जाती है】

रंग का डिब्बा उठा लेने की एक सादा सी भूल 
घर के बाहर खेलते बच्चे के चिथड़े उड़ गए 
निश्तर ख़ानक़ाही 

नैरंगी-ए-सियासत-ए-दौराँ तो देखिए
मंज़िल उन्हें मिली जो शरीक-ए-सफ़र न थे
मोहसिन भोपाली
【नैरंगी-ए-सियासत-ए-दौराँ=सियासत के मायाजाल का दौर】

जब चली ठंडी हवा बच्चा ठिठुर कर रह गया
माँ ने अपने लाल की तख़्ती जला दी रात को
सिब्त अली सबा

परिंदों में तो ये फ़िरकापरस्ती भी नहीं देखी 
कभी मंदिर पे जा बैठे, कभी मस्जिद पे जा बैठे 
नूर तक़ी नूर
【फ़िरकापरस्ती=मज़हबी भेदभाव रखने वाला】

मौजों की सियासत से मायूस न हो 'फ़ानी'
गिर्दाब की हर तह में साहिल नज़र आता है
फ़ानी बदायुनी
【गिर्दाब=भँवर,साहिल=किनारा】

तुम से पहले वो जो इक शख़्स यहाँ तख़्त-नशीं था
उस को भी अपने ख़ुदा होने पे इतना ही यक़ीं था
हबीब जालिब

 जो देखता हूं वही बोलने का आदी हूं 
मैं अपने शहर का सबसे बड़ा फ़सादी हूं 
शकील शाह 

ये जो बेहाल सा मंज़र ये जो बीमार से हम तुम
सियासत की नवाज़िश है किसी से कुछ नहीं बोलें
अज़हर हाश्मी
【नवाज़िश=कृपा】

राजपथ पर जब कभी जयघोष होता है 
आदमी फुटपाथ पर बेहोश होता है 
बशीर अहमद 'मयूख

फिर इस मज़ाक़ को जम्हूरियत का नाम दिया
हमें डराने लगे वो हमारी ताक़त से
नोमान शौक़
【जम्हूरियत=प्रजातंत्र】

समझने ही नहीं देती सियासत हम को सच्चाई
कभी चेहरा नहीं मिलता कभी दर्पन नहीं मिलता
अज्ञात

ये कैसी सियासत है मिरे मुल्क पे हावी
इंसान को इंसाँ से जुदा देख रहा हूँ
साबिर दत्त

अंदर का ज़हर चूम लिया धुल के आ गए कितने शरीफ़ लोग थे सब खुल के आ गए 
राहत इंदौरी

उन का जो फ़र्ज़ है वो अहल-ए-सियासत जानें
मेरा पैग़ाम मोहब्बत है जहाँ तक पहुँचे
जिगर मुरादाबादी
【अहल-ए-सियासत=राजनीतिज्ञ】

चेहरे हैं कि सौ रंग में होते हैं नुमायाँ
आईने मगर कोई सियासत नहीं करते
खुर्शीद अकबर
【नुमायाँ=दृश्यमान】

कितने चेहरे लगे हैं चेहरों पर
क्या हक़ीक़त है और सियासत क्या
साग़र ख़य्यामी

मैं पैरवी-ए-अहल-ए-सियासत नहीं करता
इक रास्ता इन सब से जुदा चाहिए मुझ को
अर्श सिद्दीक़ी

इन से उम्मीद न रख हैं ये सियासत वाले
ये किसी से भी मोहब्बत नहीं करने वाले
नादिम नदीम

दिल ही तो है सियासत-ए-दरबाँ से डर गया
मैं और जाऊँ दर से तिरे बिन सदा किए
मिर्ज़ा ग़ालिब
【सियासत-ए-दरबाँ=राजनीति का द्वार,जहाँ से राजनीति की शरुआत होती है 】

जम्हूरियत इक तर्ज़-ए-हुकूमत है कि जिस में
बंदों को गिना करते हैं तौला नहीं करते
अल्लामा इक़बाल
【तर्ज़-ए-हुकूमत=सत्ताओं के रूप,प्रकार】

सुब्ह कैसी है वहाँ शाम की रंगत क्या है
अब तिरे शहर में हालात की सूरत क्या है
अज़हर अदीब

काँटों से गुज़र जाता हूँ दामन को बचा कर
फूलों की सियासत से मैं बेगाना नहीं हूँ
शकील बदायूंनी



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