Best motivational shayari
हौसलों से भरपूर उम्दा शायरी

ज़िन्दगी जीने का पहले हौसला पैदा करो
सिर्फ़ ऊँचे ख़ूबसूरत ख़्वाब मत देखा करो
मंज़र भोपाली
Best motivational shayari

【बारे=अंततः,शाद=ख़ुश, उल्लासित,यां=यहाँ】


रास्ता सोचते रहने से किधर बनता है 
सर में सौदा हो तो दीवार में दर बनता है 
जलील ’आली’

“ये कब चाहा कि मैं मशहूर हो जाऊँ 
बस अपने आप को मंज़ूर हो जाऊँ 
मिरे अंदर से गर दुनिया निकल जाए 
मैं अपने-आप में भरपूर हो जाऊँ “ 
राजेश रेड्डी

ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले 
ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है 
अल्लामा इक़बाल

लहरों को खामोश देखकर यह न समझना कि समंदर में रवानी नहीं है, हम जब भी उठेंगे,तूफ़ान बन कर उठेंगे,उठने की अभी ठानी नहीं है
अज्ञात

कोशिश भी कर उमीद भी रख रास्ता भी चुन 
फिर इस के ब'अद थोड़ा मुक़द्दर तलाश कर 
निदा फ़ाज़ली

कभी मैं अपने हाथों की लकीरों से नहीं उलझा मुझे मालूम है क़िस्मत का लिक्खा भी बदलता है 
बशीर बद्र

उठो ये मंज़र-ए-शब-ताब देखने के लिए 
कि नींद शर्त नहीं ख़्वाब देखने के लिए 
इरफ़ान सिद्दीक़ी
【मंज़र-ए-शब-ताब=उजाले से भरपूर रात्री】

लोग कहते हैं बदलता है ज़माना सब को 
मर्द वो हैं जो ज़माने को बदल देते हैं 
अकबर इलाहाबादी

चला जाता हूँ हँसता खेलता मौज-ए-हवादिस से 
अगर आसानियाँ हों ज़िंदगी दुश्वार हो जाए 
असग़र गोंडवी
【मौज-ए-हवादिस=दुर्घटनाओं का नित्य क्रम,दुश्वार=कठिन】

प्यासो रहो न दश्त में बारिश के मुंतज़िर 
मारो ज़मीं पे पाँव कि पानी निकल पड़े 
इक़बाल साजिद
【दश्त=जंगल,मुंतज़िर=इंतज़ार में】

मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर 
लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया 
मजरूह सुल्तानपुरी
【जानिब-ए-मंज़िल=मन्ज़िल की तरफ】

हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उट्ठें 
वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं 
साहिर लुधियानवी
बर्क़=बिजली】

न हम-सफ़र न किसी हम-नशीं से निकलेगा 
हमारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा 
राहत इंदौरी

कश्तियाँ सब की किनारे पे पहुँच जाती हैं 
नाख़ुदा जिन का नहीं उन का ख़ुदा होता है 
अमीर मीनाई
【नाख़ुदा=नाविक】

अब हवाएँ ही करेंगी रौशनी का फ़ैसला 
जिस दिए में जान होगी वो दिया रह जाएगा 
महशर बदायुनी

तू शाहीं है परवाज़ है काम तेरा 
तिरे सामने आसमाँ और भी हैं 
अल्लामा इक़बाल
शाहीं=बाज़,परवाज़=ऊंची उड़ान】

अभी से पाँव के छाले न देखो 
अभी यारो सफ़र की इब्तिदा है 
एजाज़ रहमानी
【इब्तिदा=शुरुआत】

हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं 
हम से ज़माना ख़ुद है ज़माने से हम नहीं 
जिगर मुरादाबादी

इन अंधेरों से परे इस शब-ए-ग़म से आगे 
इक नई सुब्ह भी है शाम-ए-अलम से आगे 
इशरत क़ादरी
【शाम-ए-अलम=गमगीन शाम】

मिरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा 
इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा 
अमीर क़ज़लबाश
【सियाह=गहरे,नूर=उजाला】

जो तूफ़ानों में पलते जा रहे हैं 
वही दुनिया बदलते जा रहे हैं 
जिगर मुरादाबादी

कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता 
एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो 
दुष्यंत कुमार

अपना ज़माना आप बनाते हैं अहल-ए-दिल 
हम वो नहीं कि जिन को ज़माना बना गया 
जिगर मुरादाबादी
【अहल-ए-दिल=दिल वाले लोग,दिल की सुनने वाले】

वो चाहता था कि कासा ख़रीद ले मेरा  
मैं उसके ताज की क़ीमत लगा के लौट आया 
राहत इन्दौरी
कासा=भिखारी का कटोरा】

मैं किसी तरह भी समझौता नहीं कर सकता या तो सब कुछ ही मुझे चाहिए या कुछ भी नहीं 
जव्वाद शेख़






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