One Of The Best Safar Shayari 
बेहतरीन  सफर शायरी 

नाकामयाबी या ठोकरें नहीं तोड़ पातीं मुसाफ़िर को 
मुसाफ़िर को तोड़ता है उसका सफ़र ना कर पाना ..

◆ज़िंदगी है मुख़्तसर आहिस्ता चल
कट ही जाएगा सफ़र आहिस्ता चल
~शाहीन ग़ाज़ीपुरी
[मुख़्तसर=संक्षिप्त, थोड़ी सी]

◆वो लुत्फ़ उठाएगा सफ़र का 
आप-अपने में जो सफ़र करेगा 
~ ग़मगीन देहलवी
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◆न थके कभी पैर,न हिम्मत हारी है.. 
जज्बा है परिवर्तन का जिदंगी में.. 
इसलिए सफर ज़ारी है

◆मैं लौटने के इरादे से जा रहा हूँ मगर 
सफ़र सफ़र है मिरा इंतिज़ार मत करना 
~साहिल सहरी नैनीताली
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◆जो लौट आए कोई सफ़र से तो फिर मुसाफ़िर कहाँ रहा वो 
वही मुसाफ़िर है जो सफ़र में है और कभी लौट कर न आए 
~अलीना इतरत

◆मुझ को चलने दो अकेला है अभी मेरा सफ़र
रास्ता रोका गया तो क़ाफ़िला हो जाऊँगा
~वसीम बरेलवी

◆सफ़र की हद है वहाँ तक कि कुछ निशान रहे
चले चलो के जहाँ तक ये आसमान रहे
~राहत इन्दौरी

◆इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई 
हम न सोए रात थक कर सो गई 
~राही मासूम रज़ा

◆आए ठहरे और रवाना हो गए 
ज़िंदगी क्या है, सफ़र की बात है 
~हैदर अली जाफ़री

◆इश्क़ की उम्र ठीक नहीं जवानी तक
साथ सफ़र झुर्रियों तक होना चाहिए
~गुलज़ार

◆ये भी इक शर्त-ए-सफ़र है हम-सफ़र कोई न हो
जिस किसी भी रास्ते को तय करूँ तन्हा करूँ
~रियाज़ मजीद
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◆जाने कैसा रिश्ता है रहगुज़र का क़दमों से
थक के बैठ जाऊँ तो रास्ता बुलाता है
~शकील आज़मी
[रहगुज़र=रास्ता]

◆हर शिकवा ना-बजा है, यारो ! ये माजरा है हम जान से गए 
पर तौर-ए-सफ़र ना आया
~जौनएलिया
[ना-बजा=ठीक नहीं,माजरा=हाल,तौर-ए-सफ़र=सफर का तरीका]

◆जख्म कहाँ कहाँ से मिले ये छोड़ ऐ जिदंगी
 तु तो ये बता सफर और कितना बाकि है
~गुलजार

◆सफ़र में ऐसे कई मरहले भी आते हैं 
हर एक मोड़ पे कुछ लोग छूट जाते हैं 
~आबिद अदीब
[मरहले=सफर के बीच पड़ने वाले स्थान]

◆मुझे ख़बर थी मिरा इंतिज़ार घर में रहा
ये हादसा था कि मैं उम्र भर सफ़र में रहा 
~साक़ी फ़ारुक़ी

◆इक सफ़र में कोई दो बार नहीं लूट सकता 
अब दोबारा तिरी चाहत नहीं की जा सकती 
~जमाल एहसानी

◆किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल 
कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा 
~अहमद फ़राज़

◆आए ठहरे और रवाना हो गए 
ज़िंदगी क्या है, सफ़र की बात है 
~हैदर अली जाफ़री

◆चले थे जिस की तरफ़ वो निशान ख़त्म हुआ 
सफ़र अधूरा रहा आसमान ख़त्म हुआ 
~ग़ुलाम मुर्तज़ा राही

◆न जाने कौन सा मंज़र नज़र में रहता है
तमाम उम्र मुसाफ़िर सफ़र में रहता है
~निदा फ़ाज़ली

◆सफ़र का मरहला-ए-सख़्त ही ग़नीमत था
ठहर गए तो बदन की थकन ज़ियादा हुई
~नसीम सहर
[मरहला-ए-सख़्त=कठिन स्थिति.ग़नीमत=ठीक,अच्छा,]

◆मैं अपने आप में गहरा उतर गया शायद 
मिरे सफ़र से अलग हो गई रवानी मिरी 
~अब्बास ताबिश
[रवानी=प्रवाह]

◆ है कोई जो बताए शब के मुसाफ़िरों को 
कितना सफ़र हुआ है कितना सफ़र रहा है 
~शहरयार

◆सफ़र में अब के अजब तजरबा निकल आया
भटक गया तो नया रास्ता निकल आया
~राजेश रेड्डी

◆सफ़र का एक नया सिलसिला बनाना है
अब आसमान तलक रास्ता बनाना है
~शहबाज़ ख़्वाजा

◆ख़्वाब के आगे शिकस्त-ए-ख़्वाब का था सामना
ये सफ़र था मरहला-दर-मरहला टूटा हुआ
~आफ़ताब इक़बाल शमीम
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